राक्षसराज अकरोमा
अकरोमा ने 2000 साल तक घने जंगलों में कठोर तपस्या की। अकरोमा की जटायें और दाढ़ी- मूंछ पैरों तक बढ़ गये। सारे शरीर पर दीमक की बांबी चढ़ गई।
आखिर ब्रह्मा जी अकरोमा राक्षस की कठोर तपस्या से खुश हो गए। ब्रह्मा जी प्रकट हुए और बोले वत्स उठो तुम्हें क्या चाहिए? अकरोमा दीमक की बांबी को दौड़ता हुआ बाहर आया। और बोला पितामह मुझे तीन वरदान चाहिए।
इच्छामृत्यु
अजेय व अजर रहूं
अकूत सैन्य बल व धन संपदा
ब्रह्माजी बोले तथास्तु। और अंतर्ध्यान हो गये।
अकरोमा ने पास बह रही नदी में 2000 साल बाद जी भर कर स्नान किया और फल फूल खाकर अपनी क्षुधा शांत की।
इसके बाद अकरोमा ने जंगल से लकड़ियां तोड़ी और बड़ा सा गट्ठा बनाकर निकट के शहर में आया। लकड़ियां बेचकर उसने कुछ धन इकट्ठा किया और इससे कुछ सुंदर वस्त्र खरीदे और नाई की दुकान में जाकर अपनी बाल दाढ़ी मूंछ बनवाये।
वह जंगल में एक सुंदर कुटिया बनाकर रहने लगा। उसने गृहोपयोगी वस्तुएं खरीदी। वह धीरे धीरे एक संपन्न व्यक्ति बन गया। उसे देखकर वहां कुछ अन्य लोग भी बसने लगे। कुछ ही दिन में वहां एक गांव बन गया। अकरोमा को गांव का मुखिया बना दिया गया। कुछ वर्षों में गांव एक शहर बन गया। अब अकरोमा उस शहर का राजा बन गया।
धीरे-धीरे धीरे ब्रह्मा जी की वरदान के कारण अकरोमा दानव के पास अकूत धन व अकूत सैन्य हो गया।
अब अकरोमा ने संपूर्ण पाताल देश को जीत लिया और पाताल का दैत्य सम्राट बन गया। अकरोमा दैत्य सम्राट महाबली का वंशज था। अकरोमा ने पाताल देश को धन संपन्न और शक्तिशाली बना दिया।
अकरोमा धर्म पूर्वक पाताल देश में राज्य करने लगा।
असुर राज मुष्टिक ने सम्पूर्ण पृथ्वी पर आतंक मचा रखा था। उसकी सेनायें मानवों का वध कर उनका भक्षण करती फिर रही थी। उसकी सेना की एक बटालियन एक गांव सरजू पुरा का घेरा डाले हुई थी। इस बटालियन का अध्यक्ष था सुपर्ण जो एक क्रूर नायक था। सुपर्ण ने कुछ वर्ष पहले आतंकवादियों से आतंकवाद की ट्रेनिंग ली थी। सुपर्ण ने सारे गांव को जीत लिया। सारे गांव के लोग एक लाइन में खड़े थे। सुपर्ण ने आदेश दिया कि इनमें से 18 से 25 वर्ष की खूबसूरत लड़कियों को अलग करो और शेष लोगों का वध कर दो। इन खूबसूरत 20-25 लड़कियों को लेकर वह आगे बढ़ा।
सुपर्ण ने इसी तरह कई गांवों को खत्म कर दिया और एक बड़े गुप्त स्थान पर इन खूबसूरत लड़कियों को कैद कर दिया।
लीजिए महाराज मुष्टिक इन लड़कियों को मिलाकर कुल 100000 लड़कियां हो गई हैं। अब आप अपना यज्ञ शुरू कर सकते हैं।
ठीक है सुपर्ण, मुष्टिक बोला लेकिन अब मुझे एक वह अंतिम राजकुमारी चाहिए जो पदमनी हो।
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