क्या वह भूत था--------

       यह घटना आज से 10 वर्ष पूर्व की पूर्व की है। मैं गाजियाबाद की एक कॉलोनी में रहता था। मैं वहां किराए के मकान में रहता था।कॉलोनी में काफी घर थी। कॉलोनी वाले अच्छे मिलनसार स्वभाव के थे। उस समय मैं किसी नौकरी की खोज में था। लेकिन कोई ढंग की नौकरी नहीं मिली।
     

       हम अक्सर सुबह शाम कॉलोनी  से बाहर घूमने फिरने जाया करते थे। कभी-कभी मैं दिल्ली की तरफ घूमने चला जाया करता था। मैं वहां नया था। इसलिए घूमने फिरने में मुझे बहुत आनंद आता था।


      वहां आसपास के लोग देवी-देवताओं व भूत प्रेत में बहुत विश्वास रखते थे। क्योंकि वहां ज्यादातर लोग निम्न वर्ग के थे।


      मुझसे कुछ साल पहले अपनी कार चलाते हुए एक एक्सीडेंट हो गया था। जिसमें एक आदमी मर गया था। केस कोर्ट में गया और मैं निर्दोष साबित हुआ और मैं ससम्मान केस से बरी हो गया। उसके कुछ साल बाद में इस कॉलोनी में आ गया था।


       मैं अपनी पत्नी से अक्सर पूछता कि क्या भूत प्रेत होते हैं? तो वह हमेशा हंसकर जवाब देती यह सब भ्रम है भूत प्रेत नाम की कोई चीज नहीं होती है। नौकरी ना मिलने से मैं घर पर ही कुछ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगा।


      मुझे भूत पर कोई विश्वास नहीं था। मैं इन सब बातों को अंधविश्वास और पाखंड समझता था। एक दिन मेरी सोच ही बदल गई।


        एक दिन मैं अपने एक स्टूडेंट के साथ बुध बाजार से सब्जी खरीदने के लिए शाम के समय घर से निकला। बाजार में घूमते घूमते हमें कुछ देर हो गई। हम वापस आने लगे। घर जाने का रास्ता सुनसान होने लगा।


      हम पैदल ही घर की तरफ चल दिए। अचानक मुझे लगा कि कोई साया मेरा पीछा कर रहा है। मैंने अपने स्टूडेंट से कहा कि कोई हमारा पीछा कर रहा है क्या? स्टूडेंट मुस्कुराते हुए बोला मुझे तो ऐसा नहीं लग रहा है, वह कोई कॉलोनी का आदमी होगा।


       मैं राजपूत होने के कारण खुद को बहुत बहादुर समझता था। मैं रुक कर उस साए का इंतजार करने लगा। साया हम तक कुछ ही देर में पहुंच गया। वह बुदबुदा रहा था। तूने 2 साल पहले मुझे जान से मारा था। कोर्ट ने तुझे छोड़ दिया पर मैं तुझे नहीं छोडूंगा। अचानक वह गायब हो गया।


       मैंने अपने स्टूडेंट से पूछा वह कौन था। और क्या बोल रहा था। अभी कहां चला गया। स्टूडेंट ने अनभिज्ञता दर्शाई। और हम जल्दी-जल्दी घर चलने लगे।


     उसके बाद अक्सर वह साया मुझे दिखाई देने लगा। मैं सोच में पड़ गया। 2 साल पहले की वह दुर्घटना मुझे याद आने लगी। धीरे-धीरे वह साया मुझे दिखाई देना बंद हो गया। अब मुझे ऐसा लगा कि वह साया मेरे वजूद में समा गया है।


      कुछ ही दिनों बाद मेरे अंदर से साए की जैसे आवाज आने लगी तूने मुझे मारा था मैं तुझे नहीं छोडूंगा।मार डालूंगा तुझे।


      इतना सब होते हुए भी मैं इस सब को अभी तक एक बहम ही समझ रहा था। पर जब यह बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मैंने अपनी दिनचर्या में सुधार कर दिया। अपना रहन-सहन खाना पीना सात्विक कर दिया और महामृत्युंजय मंत्र का जप करने लगा। कुछ ही दिनों में साया की आवाज और अस्तित्व लुप्त हो गया।


      परंतु आज भी वह घटना मुझे स्वप्न सी लगती है। आखिर ये सब क्या था? मेरा अपराध बोध या कोई आत्मा या सिर्फ एक बहम।


     आप ही बताइए यह सब क्या था


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