एक किसान

दीपक एक साधारण किसान था। उसके घर में कुल 15 सदस्य थे। उसका परिवार एक संयुक्त परिवार था। इनमें 3 बच्चे, चार स्त्रियां, पांच युवक व तीन वृद्ध थे। अचानक उसके परिवार में दो वृद्धों, दो स्त्रियों, एक युवक व एक बच्चे की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई। अब परिवार में मात्र 9 व्यक्ति ही बचे। अब दीपक परिवार का मुखिया बन गया।


   दीपक ने चकबंदी में हिस्सा लिया। घर के सभी बचे लोगों को खेती में लगा दिया। 8 गाय - भैंस आदि उसने ने बेच दी और प्राप्त धन में कुछ धन और मिलाकर उसने एक सुंदर उन्नत गाय ली। इन सब से उसने कुछ धन एकत्र कर लिया। कुछ धन रिजर्व रख दीपक ने बाकी धन से अपना मकान, गौशाला आदि की रिपेयरिंग, पेंटिंग आदि करवाई। फालतू का सामान कबाड़ी को दे दिया। घर के लिए वस्त्र, राशन, दवाई आदि की व्यवस्था की। अपने 105 वर्षीय दादाजी के लिए अलग कमरे की व्यवस्था की।


    खाली समय में दीपक पुस्तकें लिखने लगा। 5-6 नये बच्चों के जन्म से उसके परिवार में फिर से 15 सदस्य हो गये। दीपक ने अपने घर की अर्थ- व्यवस्था सुधार दी व जनसंख्या 15 पर ही स्थिर कर दी। अब उसने अपने घर की शिक्षा रहन-सहन आदि को उन्नत किया।

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